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Saturday, March 23, 2024

Uttar Pradesh: Boy says he died 8 years ago, goes to old home, claimed rebirth

 Uttar Pradesh: Boy says he died 8 years ago, goes to old home, claimed rebirth

In an extraordinary turn of events, a thirteen-year-old boy, presumed to have perished in a tragic drowning incident eight years ago in a canal near Kanpur, has mystifyingly reappeared in his village of Nagla Salehi, nestled within Uttar Pradesh's Mainpuri district.


The lad, now known as Chandraveer alias Chotu, son of Ramnaresh Shankhwar from the neighboring Nagla Amar Singh village, has brought with him tales that have captivated the entire community.


Rohit Kumar, the deceased boy from May 4, 2013, has seemingly reincarnated into Chandraveer, who confidently asserts his familial connection to Pramod Kumar and Usha Devi as his parents from a past life.


Upon reuniting with his "previous" family, Chandraveer astounded them with vivid recollections of his former existence, even identifying his sister amidst the emotional reunion.


News of his return spread like wildfire, drawing villagers to Pramod's abode, eager to hear firsthand accounts of Chandraveer's purported reincarnation.


In a remarkable display of recognition, Chandraveer identified Subhash Chandra Yadav, the former headmaster of the local secondary school, promptly paying his respects. Witnesses attest to Chandraveer's seemingly innate familiarity with individuals and places from Rohit's past life.


Seeking further validation, villagers escorted Chandraveer to the very school Rohit once attended. There, teachers posed questions that only Rohit could have answered. Much to everyone's amazement, Chandraveer responded with uncanny accuracy, reinforcing the enigmatic nature of his claims.


Chandraveer's father, Shankhwar, disclosed that his son had exhibited a fascination with reincarnation since childhood, persistently expressing a desire to return to Nagla Salehi. Despite their apprehensions, they relented, accompanying Chandraveer on this inexplicable journey back to the village.


The saga of Chandraveer's return continues to intrigue and confound, leaving the community awash with wonder and speculation about the mysteries of life and death.

See reference: https://www.indiatoday.in/india/story/uttar-pradesh-boy-who-died-eight-years-ago-claims-he-had-a-rebirth-1843294-2021-08-20

Sunday, November 13, 2011

Reincarnation Story of 2.5 year child Jaybeer, Thari Village, Karnal

ढाई साल का जयबीर यहां के लोगों के लिए बना 'चमत्कार'!

(Reincarnation Story of 2.5 year child Jaybeer, Thari Village, Karnal)

निसिंग (करनाल). ठरी गांव में पैदा हुआ ढाई वर्षीय जयबीर सिंह अपने पूर्व जन्म की कहानी अपने परिजनों को बताता है। वह स्वयं को जयमल बताता है, जिसकी 1999 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। दोनों ही परिवार व अन्य लोग इसे भगवान का करिश्मा मान रहे हैं। नन्हा सा यह बालक अपने पूर्व जन्म के पुत्रों की पहचान करता है।

परिजनों के अनुसार वह बार-बार अपने पूर्व गांव डाचर में जाने की बात करता है। जानकारी मिलने के बाद पिछले सभी रिश्तेदार ठरी जाकर उससे मिलने जा रहे हैं। अन्य गांवों के लोग भी उसके पूर्व जन्म की बातों को सुनने के लिए आ रहे हैं। पूछे जाने पर जयबीर कहता है कि मंजूरा गांव के पास बाइक पर उसे व उसके लड़के देव को चोट लगी थी।

कुछ हद उसकी कही बातें पिछले परिजनों को रास आ रही हैं। जयबीर के पिता रणबीर सिंह व उनकी दादी जोगिंद्र कौर का कहना है कि वह पिछले करीब दो माह से अजीब सी बातें कर रहा था। जब उन्होंने इन बातों को गहराई से लिया तो उन्हें पूर्व जन्म के आभास का पता चला। जो बातें वह कर रहा था अधिकतर सही मिल रही हैं। डाचर की वृद्धा सिंद्र कौर जो ठरी में विवाहित है उसे वह अपनी चचेरी बहन कह अपने घर पर खाना भी खिलाता है।

खाना न खाने से वह अपने परिजनों से खफा भी होता है। वह अपने परिजनों से अपने गांव डाचर जाकर रहने की बात भी करता है। जयबीर सिंह की यह कहानी क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है। शनिवार को जयमल का बेटा सिंदर व बालू में विवाहित उसकी बेटी का परिवार भी ठरी उससे मिलने गए। जयबीर सिंह ने कुछ बातें ऐसी बताई जिससे दोनों को आभास हुआ कि यह जयमल का दूसरा जन्म हो सकता है।

अब जयबीर जाएगा डाचर

अगले रविवार को रणबीर सिंह अपने बेटे जयबीर सिंह को साथ लेकर डाचर गांव में जाएगा। जहां असलियत का पता लगाया जाएगा। हालांकि जयबीर सिंह बोलते वक्त तुतलाता है, लेकिन परिजन कह रहे हैं वे उसे लेकर डाचर जाएंगे, जहां वह अपने पूर्व जन्म के परिजनों से मिलेगा।

News : http://www7.bhaskar.com/article/HAR-HAR-HIS-pre-birth-story-2459157.html
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Reincarnation story of Sachin, A 2.5 year child in Hindoncity

ढाई साल के बच्चे को याद हैं पिछले जन्म की बातें!

(Reincarnation story of Sachin, A 2.5 year child in Hindoncity)

हिण्डौनसिटी। ढाई साल के एक बच्चे ने पूर्व जन्म की बातें याद होने का दावा करते कहा है कि वह इससे पहले उसी गांव में जन्म ले चुका है। उसकी मृत्यु के बाद उसने अपने मित्र के घर पुन: जन्म लिया। जाटव बस्ती के खारा कुआं कॉलोनी के सियाराम जाटव की मानें तो सात दिन पूर्व उसके ढाई वर्षीय बालक सचिन ने पूर्व जन्म में भी खुद के उसी गांव में पैदा होने की बात बताई। उसने कहा कि पूर्व जन्म में वह चौबे पाडा निवासी बृजेश पाठक पान वाला था।
उसकी ढाई वर्ष पूर्व किडनी की बीमारी से मौत हो गई थी। बालक की जिद पर परिजन उसे बृजेश के पिता छोटेलाल के घर ले गए। इस दौरान बालक ने अपने कथित पूर्व जन्म के परिजनों को पहचान लिया।
छोटे लाल के अनुसार, उसके घर की एलबम में सचिन ने उसकी पुत्रवधू कुसुमलता (बृजेश की पत्नी) को स्वयं की पत्नी व पोते भविष्य (6) व गगन (4) को अपना पुत्र बताया। इधर सियाराम का कहना है कि मृतक बृजेश पाठक (32) उसका मित्र था। अग्रसेन महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य व मनोविज्ञान के प्रवक्ता डॉ. सुनील अग्रवाल का कहना है कि व्यवहार में पूर्वजन्म की याद्दाश्त को पुनर्जन्म के रूप में देखा जाता है।

Reincarnation : 3 years child told story of his previous life

पूर्वजन्मः तीन साल के बालक की तीस वर्ष की पत्नी

( Reincarnation : 3 years child told story of his previous life)
His wife of previous life founds it true and accpts 3 year husband)

पीलीभीत: तीन साल का अर्पन और तीस साल की चंदना के बीच रिश्ता पति-पत्नी का है। हैरान मत हों, ऐसा दावा करने वाला है, अर्पण जिसकी 27 साल पहले पैसे को लेकर दोस्तों ने हत्या कर दी थी। पूर्वजन्म का यह दावा बंगाली समुदाय के लोगों में ही क्षेत्र में चर्चा का मौजू बना हुआ है।पूरनपुर तहसील के ग्राम फूल चन्दुइया निवासी डा0 सुभाश मंडल के रिष्तेदार बंगाल से आये इन में तीन साल का अर्पन मंडल अपने पूर्वजन्म का दावा कर रहा है। इसके दावे को सभी मान रहे हैं क्योंकि वह जो बता रहा है वह उसके परिवारजनों द्वारा पुश्टि करने पर सही पाया गया है।उसके साथ उसके पिछले जन्म की पत्नी चंदना भी उसके साथ है। जो तीस साल की हो चुकी है। चंदना अपने पुराने जीवनसाथी को उसके नये जीवन में भी पूरा ख्याल रख रही है। कहा जाता है कि यदि चंदना किसी से हंसकर बोल दे तो अर्पन का पारा हाई हो जाता है। बंगाल प्रदेष के गांव बजुआ निवासी सुषान्त मंडल और उसकी पत्नी रूहीना का कहना है कि पिछले जन्म में अर्पन बंगाल के जिला नोडेराबाद का रणजीत मण्डल था। उसके दोस्तों ने पैसों के लेन-देन में उसके हाथ-पैर बांधकर गला काटकर हत्या कर दी थी। अर्पन ने उसके घर जन्म लेने के बाद पिछली बातें बताना शुरू कर दीं। पूर्व जन्म की कहानी को अर्पना अपनी जुबानी में बता रही है। साथ ही वह निषान भी दिखाता है जो पूर्व जन्म में उसके दोस्तों ने दिये हैं। इस पूर्व जन्म की कहानी को बंगाल के सभी अखबारों ने प्रकाषित किया है। इस कहानी को जहां एक ओर उसके परिवारजन सही मान रहे हैं वहीं क्षेत्र के लोग अपनी-अपनी राय पेष करके इसको चर्चा का मौजू बनाये हुये हैं।—

One more Story of Reincarnation in India

पूर्व जन्म की कहानी ( One more Story of Reincarnation in India)

मेरा नाम भीम नहीं है जय निरंजन पुनर्जन्म की पहली घटना सबसे पहले मैने अपने ही गांव महरहा, तहसील- बिन्दकी, जिला-फतेहपुर (उ. प्र.) में सुनी थी।
यद्यपि इस घटना का तथ्यपरक वैज्ञानिक अध्ययन अभी तक किसी परामनोविज्ञानी द्वारा नहीं हो सका है क्योंकि इस घटना की जानकारी उस समय किसी समाचार पत्र में भी नहीं दी गयी थी।

मैने इस घटना के बारे में जैसा सुना है उसका विवरण इस प्रकार है।

करीब 1990 के आस-पास की बात है। मैं कक्षा सात में पढ़ता था। मेरे गांव महरहा में डॉ. राकेश शुक्ला के चार वर्षीय बेटे भीम ने अपने माता-पिता से यह कहना शुरू कर दिया कि उसका नाम भीम नहीं है और न ही यह उसका घर है। उसके द्वारा रोज-रोज ऐसा कहने पर एक दिन उन्होंने पूछा कि, बेटा, तुम्हारा नाम भीम नहीं है तो क्या है और तुम्हारा घर यहां नहीं है तो कहां है?

 इस पर भीम ने जो उत्तर दिया उससे डॉ. शुक्ला आश्चर्य चकित रह गए। उसने जबाब दिया कि उसका असली नाम- 'सुक्खू' है। वह जाति का चमार है एवं उसका घर बिन्दकी के पास मुरादपुर गांव में है। उसके परिवार में पत्नी एवं दो बच्चे हैं। बड़े बेटे का नाम उसने मानचंद भी बताया। आगे उसने यह भी बताया कि वह खेती-किसानी करता था।

एक बार खेतों पर सिंचाई करते समय उसके चचेरे भाइयों से विवाद हो गया, जिस पर उसके चचेरे भाइयों ने उसे फावड़े से काटकर मार डाला था।

भीम ने अपने पिता डॉ. राकेश शुक्ला से अपनी पूर्वजन्म की पत्नी और बच्चों से मिलने की इच्छा भी जतायी। मुरादपुर, महरहा से तीन-चार किलोमीटर की दूरी पर ही है।

इसलिए डॉ. शुक्ला ने एक दिन उस गांव में जाकर लोगों से सुक्खू चमार और उसके परिजनों के बारे में पूछ-ताछ की तो उन्हें भीम द्वारा बतायी गयी सारी जानकारी सही मिली।

 डॉ. शुक्ला के मुरादपुर से लौटने के बाद एक दिन सुक्खू चमार की पत्नी अपने दोनों बच्चों तथा कुछ अन्य परिजनों के साथ डॉ. शुक्ला के घर भीम को देखने आयी।

यहां पर भीम ने अपने पूर्व जन्म के सभी परिजनों को पहचाना एवं उन्हें उनके नाम से संबोधित भी किया। पत्नी के द्वारा पैर छूने एवं रोने पर उसने उसे ढाढस भी बंधाया और उसके सिर पर हाथ फेरा। जब वे लोग भीम से घर चलने के लिए बोले तो वह सहर्ष तैयार हो गया लेकिन डॉ. शुक्ला एवं उनकी पत्नी ने उसे नहीं जाने दिया।

इस घटना के बाद भीम अक्सर अपनी पूर्व पत्नी एवं बच्चों से मिलने की बात करता रहता था। इससे डॉ. शुक्ला काफी परेशान भी हुए। बाद में उन्होंने भीम की पूर्वजन्म की स्मृति को समाप्त करने के लिए किसी तांत्रिक की सहायता ली। जिससे बाद में भीम की पूर्वजन्म की स्मृति समाप्त हो गयी। वर्तमान में भीम शुक्ला बी. टेक कर रहा है।

इस घटना के सभी व्यक्ति एवं स्थान वास्तविक हैं। उ. प्र. के फतेहपुर जिले में बिंदकी तहसील मुखयालय से 4 किमी. दूर भीम शुक्ला पुत्र राकेश शुक्ला का गांव महरहा है। एवं बिंदकी तहसील मुखयालय से 1 किमी दूर मुरादपुर में स्व. सुक्खू हरिजन का घर एवं परिजन हैं। डॉराकेश शुक्ला का क्लीनिक एवं सीमेंट की दुकान बिन्दकी में महरहा रोड पर स्थित है।
News source : Future Samachar

Reincarnation Story by 4 year child Ayush India

पूर्व जन्म की कहानी बता रहा मासूम, हैरत में पड़ा पूरा गांव

सीतामढी. बिहार के शिवहर जिले के महुअरिया गांव के चार वर्षीय आयुष को अपनी पूर्व जन्म की सभी बातें बखूबी याद हैं। उसकी बातों को सुनकर परिजन ही नहीं बल्कि पूरा इलाका हैरत में है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग उसकी बातों को सुनने के लिए गांव पहुंच रहे हैं। उदय चन्द द्विवेदी के द्वितीय पुत्र आयुष बीते एक सप्ताह से पूर्व जन्म की बातें याद होने का दावा कर रहा है और उसके घर पहुंच रही भीड़ से पूर्व जन्म की बातों को धड़ल्ले से बखान कर रहा है।

मां जता रही अनहोनी की आशंका

उसकी मां सुमन देवी बताती है कि पत्र-पत्रिकाओं में पढ़ा था कि कुछ लोगों को पूर्व जन्म की बातें याद रहती हैं। परन्तु अब उनके माथे पर ही यह पड़ गया। वे किसी अनहोनी की आशंका व्यक्त करते हुए कहती हैं कि जो भी हो रहा है वह उनके परिवार के लिए अच्छा नहीं है। इधर, चार वर्षीय आयुष ने बताया कि पूर्व जन्म में उसका नाम उज्जैन सिंह था तथा उसकी पत्नी का नाम बेबी सिंह था। उसके पिता धीरेन्द्र सिंह और माता वीणा देवी थीं। वे तीन भाई थे। जिनका नाम धीरज, नीरज व धर्मेन्द्र था

पिछले जन्म में दिल्ली में था भव्य आवास

उसका दिल्ली के एलमाल चौक के रोड न. 4 में भव्य आवास है तथा चांदनी चौक की गली न. 5 में भी एक मकान है, जहां उसके बड़े भाई नीरज सिंह रहते हैं। उसके पास दो मारूती कार, एक लाइसेंसी बन्दूक तथा एक पिस्टल एवं कई मोबाईल फोन थे। उसकी तीन बहनें थीं और ससुराल बिहार के औरगांबाद जिले में था। आयुष का दावा है कि उसकी शादी का जोड़ा आज भी उसके अलमीरा में सजाकर रखा हुआ है। सोने वाले कमरे में उसका और उसकी पत्नी बेबी सिंह का संयुक्त फोटो टंगा हुआ है

पिछले जन्म में सरकारी भवनों को बनवाता था

आयुष का कहना है कि वह पूर्व जन्म में भवन निर्माण विभाग में ठेकेदारी का कार्य करता था और सरकारी भवने बनवाता था। उसका कहना है कि उसने बाबा रामदेव का योग भी त्रिकुट गांव में सीखा था जो आज भी याद है। चार वर्ष की उम्र में ही आयुष अच्छी तरह से योग भी कर लेता है। वह कहता है कि एक बार उसका एक्सीडेन्ट हो गया था, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गया था। 21 सितम्बर 2006 की सुबह उसे सांप ने कांट लिया जिसके बाद परिजनों ने इलाज कराया और वह बेहोश हो गया, जिसके बाद उसे कुछ भी याद नही हैं। आयुष की मां सुमन देवी का कहना है कि यदि आयुष का कहना सत्य है तो इसकी मौत सांप के काटने से हुई है और 21 सितम्बर 2006 के दोपहर में ही आयुष का जन्म हुआ था। हालाँकि, उसके बताये गये जगह का सत्यापन कराया जा रहा है।

News Source : http://bollywood2.bhaskar.com/article/BIH-child-telling-story-of-re-birth-in-bihar-2298022.html
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Sunday, October 9, 2011

पुनर्जन्म मेरा निजी अधिकार : दलाई लामा

Reincarnation is my personal right - Dalai Lama
पुनर्जन्म मेरा निजी अधिकार : दलाई लामा

76 वर्षीय दलाई लामा ने शनिवार को कहा कि जब वह '90 के आसपास' हो जाएंगे तो फैसला करेंगे कि क्या उनका पुनर्जन्म होना चाहिए


तिब्बती परंपरा के अंतर्गत बौद्ध भिक्षु किसी ऐसे लड़के को चुनते हैं जिसमें दिवंगत नेता के पुनर्जन्म के संकेत दिखते हैं. लेकिन बहुत से लोगों का अनुमान है कि चीन सरकार साधारण तरीके से खुद दलाई लामा का उत्तराधिकारी नियुक्त कर देगी.


चीन का कड़ा रुख
चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि पुनर्जन्म की कोई भी प्रक्रिया देश के कानूनों और नियमों के मुताबिक होनी चाहिए. मंत्रालय के प्रवक्ता होन्ग लाई ने पत्रकारों से कहा, "दलाई लामा का पद केंद्रीय सरकार द्वारा तय किया जाता है और ऐसा न करना गैर कानूनी है. दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया से जुड़े अनुष्ठानों का एक पूरा समूह है. कभी ऐसा नहीं हुआ जब दलाई लामा ने खुद अपना उत्तराधिकारी चुना हो. दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया में धार्मिक अनुष्ठानों और ऐतिहासिक परंपराओं और कानून व नियमों का ध्यान रखा जाना चाहिए."


पुनर्जन्म मेरा निजी अधिकार : दलाई लामा

आईएएनएस ॥ धर्मशाला : तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने शुक्रवार को कहा कि पुनर्जन्म का मुद्दा उनका निजी अधिकार है। दलाई लामा ने कहा कि अपना पुनर्जन्म मैं खुद तय करूंगा। इस बारे में फैसले का अधिकार और किसी को नहीं है। 14वें दलाई लामा ने कहा कि दलाई लामा संस्था का अनुसरण सदियों से किया जा रहा है। यह मेरा निजी अधिकार है कि मैं इसका पालन करूं या न करूं।

धर्मशाला.तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा है कि वे अपने पुनर्जन्म को खुद तय करेंगे। किसी अन्य को इसके निर्धारण का कोई अधिकार नहीं है। मैक्लोडगंज में आयोजित 11वीं तिब्बती धर्म संसद के दूसरे दिन शुक्रवार को उन्होंने ये विचार व्यक्त किए।

दलाई लामा ने कहा कि वे अभी पूर्णत: स्वस्थ हैं। ऐसे में उन्हें पुनर्जन्म को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। इसका निर्धारण वे करेंगे न कि चीन। निर्वासित तिब्बतियों का विश्वास है कि चीन की साम्यवादी सरकार तिब्बती बौद्ध धर्म के दो प्रमुख संस्थाओं दलाई लामा और पंचेन लामा को समाप्त करने पर तुली हुई है। अत: यह अधिक चिंता का विषय है।

Friday, July 22, 2011

Are Aliens Living On Planets Inside Black Holes?

Are Aliens Living On Planets Inside Black Holes?

Aliens could conceivably live on planets illuminated by the swirling mass of photons orbiting the singularity of a special type of black hole, according to a new theory.

Certain black holes are charged and rotate, and they possess a region past the event horizon — the point of no return — in which the fabric of spacetime appears normal again. This is called the inner Cauchy horizon.


Source : http://www.popsci.com/science/article/2011-04/can-aliens-live-inside-black-holes

Thursday, July 21, 2011

करोड़ों लोग देख सकेंगे पुनर्जन्म के प्रकरणों के प्रमाण

करोड़ों लोग देख सकेंगे पुनर्जन्म के प्रकरणों के प्रमाण (Billions of People can see evidences of ReBirth / ReIncarnation )

इंदौर (वार्ता)। पुनर्जन्म की धारणा बहुत प्राचीन है किन्तु इसके वैज्ञानिक शोध का इतिहास अत्यन्त अल्प है । इसी तरह के शोध कार्य में संलग्न इंदौर के डॉ. कीर्तिस्वरुप रावत के पास पुनर्जन्म के 500 प्रकरण संकलित है । पुनर्जन्म साक्ष्य दुनियाभर के करोडों लोग जर्मनी में बनने वाली डाकयूमेन्ट्री फिल्म के जरिए देख सकेंगे ।
डॉ. रावत के अनुसार विश्व के प्राचीनतम ग्रंथ रिग्वेद में इसका उल्लेख मिलता है किन्तु वैज्ञानिक रुप से इससे संबंधित आनुभविक साक्ष्यों की जांच कार्य का सूत्रपात 1923 में राजस्थान के किशनगढ के तत्कालीन दीवान श्यामसुन्दर लाल द्वारा किया गया था । कालांतर में अमरीका के डॉ. इयान स्टीवेन्सन ने विश्वभर में इस तरह के साक्ष्यों की विस्तृत रुप से जांच की ।
पिछले 35 वर्षों से अपनी पत्नी विद्या रावत के साथ इसी तरह के शोध कार्य में संलग्न डॉ रावत ने इंदौर में स्थापित अपने अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्जन्म एवं अतिजीवन शोध केन्द में करीब 500 पुनर्जन्म प्रकरण संकलित किये हैं। पिछले दिनों उन्होंने इस विषय पर अपनी तीसरी पुस्तक पुनर्जन्म एक वैज्ञानिक विवेचना जारी की है

Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/24863651.cms

अद्भुत पुनर्जन्म (ReBirth / ReIncarnation Miracle)

दो वर्ष की उम्र से पूजा-पाठ में तल्लीन लोकेश (ReIncarnation/ReBirth Story)

दो वर्ष की उम्र से पूजा-पाठ में तल्लीन लोकेश (ReIncarnation/ReBirth Story)

गंगेश्वरी/बुरावली। गंगेश्वरी क्षेत्र के गांव कसाईपुरा में छह वर्ष का बालक पुनर्जन्म की यादों को बता रहा है। दो वर्ष की उम्र से वह पूजा-पाठ में लगा है और हरिद्वार के पंचदशानन जूना अखाड़े के महाराज करणपुरी की सदस्यता भी ग्रहण कर चुका है। बच्चे को देखने वालों का तांता लगा हुआ है।
धन सिंह खडगवंशी का छह वर्षीय पुत्र लोकेश १० सितंबर वर्ष २००४ को पैदा हुआ था। परिजनों के मुताबिक पैदा होने के छह माह बाद ही उसने बोलना शुरू कर दिया। दो वर्ष की उम्र पूरी करते ही वह भक्ति में लीन हो गया। उसने परिजनों को बताया कि पूर्वजन्म में वह प्रभु का भक्त था और उसका नाम प्रकाश था। धन सिंह के मुताबिक ३ वर्ष की उम्र में लोकेश धूनी लगाकर तपस्या में लीन हो गया। कहने पर उसे हरिद्वार के कुंभ मेला लेकर गए, जहां पंचदनानन जूना अखाड़े के स्वामी करणपुरी व उनके शिष्य स्वामी फूलपुरी से दीक्षा ली। तीन भाईयों व दो बहनों से बड़ा लोकेश इसके बाद से गेरुए वस्त्र पहनकर तपस्पा में लीन रहता है। साधना में लीन छह वर्षीय बालक को देखने के लिए उसके घर पर भक्तों का तांता लगा रहता है। धन सिंह का कहना है कि प्रकाश उसके पिता थे और जब उनकी मौत हुई थी तो लोकेश मां के गर्भ में था। लोकेश वह सभी घटनाएं बताता है जो उसके पिता के जीवन में घटित हुई थीं।

Source : http://www.amarujala.com/city/Jyotiba%20phule%20nagar/Jyotiba%20phule%20nagar-3949-45.html






‘मैं कुमरहा का राधे हूं...’ (ReBirth/ReIncarnation Story)

‘मैं कुमरहा का राधे हूं...’ (ReBirth/ReIncarnation Story)

खटीमा। भले ही विज्ञान पुनर्जन्म की बातों पर विश्वास न करता हो लेकिन यहां न्याय पंचायत झनकट में इस तरह का एक मामला प्रकाश में आया है। ‘मैं कुमरहा का राधे हूं...’ यह कहना है झनकट में रहने वाले चाल साल के हर्षित का। बालक बता रहा है कि अज्ञात कारण से हुई मौत के बाद उसका जन्म झनकट में हुआ है। बालक की बताई बातें सच होने पर उसके पिछले और इस जन्म के परिजन उसका पुनर्जन्म होना मान रहे हैं। हालांकि चिकित्सक पुनर्जन्म की अवधारणा को मनगढ़ंत बता रहे हैं।
नगर से लगे कुमरहा गांव निवासी राधे की 23 फरवरी 2007 में अज्ञात कारणों से मौत हो गई थी। उसकी पत्नी फूलमती को राधे ने स्वप्न में बताया था कि वह झनकट में जन्म लेगा। उसके बाद फूलमती ने झनकट में काफी तलाश की लेकिन उसे बच्चे की जानकारी नहीं मिली। 27 फरवरी 2007 को झनकट निवासी नरेंद्र और मिथलेश के घर जन्मे एक बालक ने जब आम बच्चों की अपेक्षा पहले बोलना शुरू किया तो उसने खुद को कुमरहा का राधे बताया।
हर्षित की बातों की सच्चाई जानने के लिए उसके वर्तमान माता-पिता करीब 15 दिन पूर्व उसे लेकर कुमरहा गांव पहुंचे। यहां पर हर्षित की राधे के परिजनों से मिलाने पर उसने पूर्वजन्म की अधिकांश बातें बता दीं। राधे की पत्नी फूलमती ने बताया कि हर्षित ने उसे एक दुकान होने, घर के आंगन के पास जामुन का पेड़ और उसकी मौत से जुड़ी बातें अक्षरश: बताईं। फूलमती को पूरा विश्वास है कि उसके पति ने दूसरा जन्म हर्षित के रूप में लिया है। इधर हर्षित की ताई प्रतिमा राणा भी कहती हैं कि हर्षित ने जब बोलना शुरू किया था तो उसे अपने पिछले जन्म से जुड़ी अधिकांश बातें याद थी लेकिन अब धीरे-धीरे वह सब भूलने लगा है। घर के लोग भी उसे वह सब बातें भूलने के लिए कहते हैं। उन्होंने बताया कि हर्षित की पूर्वजन्म की पत्नी और बच्चे यहां आते हैं लेकिन हर्षित पूर्व जन्म की पत्नी से अधिक बात नहीं करता अलबत्ता राधे के बच्चों से खेलता है। पुनर्जन्म को लेकर आनंद अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर के मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. एके सक्सेना कहते हैं कि पुनर्जन्म की बात करना मानसिक रोग की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कई रोगी उनके पास आते हैं। कुछ लोग स्वयं को भगवान कहने लगते हैं। उन्होंने कहा कि पुनर्जन्म की अवधारणा ही गलत है।

Source : http://www.amarujala.com/city/Udham%20singh%20nagar/Udham%20singh%20nagar-15786-118.html

दुनिया के परे दुनिया है विज्ञान की चुनौती

दुनिया के परे दुनिया है विज्ञान की चुनौती (Challenges of Science : Extra Terrestrial Intelligence , ReBirth/ReIncarnation, Parallel Universe, LHC , Higgs Particle, Existence of Soul / GOD )

कानपुर। विज्ञान आगे बढ़ा है, वह दुनिया के कई रहस्य को जान चुका है, लेकिन उसके सामने है एक और दूनिया के रहस्य की। जिसके कई संकेत मिले हैं, कई तथ्य भी मिले है, लेकिन इसका तानाबाना अभी रहस्य बना हुआ है।
आईआईटी में गुरुवार को शुरू हुई टेककृति का उद्घाटन करते हुए। सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. एच. पॉल शुक ने कही। उन्होंने कहा कि दूसरे ग्रह के प्राणियों की मौजूदगी के कई प्रमाण मिले हैं, लेकिन इसके बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं मिली है। इसके लिए शोध की जरूरत है। यह विज्ञान की सबसे रहस्यात्मक और आकर्षक खोज होगी। वैज्ञानिक अब पुनर्जन्म से लेकर कई रहस्य हल करने में जुटे हैं। उन्होंने गिटार के धुनों और लैपटाप के जरिये इस दुनिया से परे किसी दुनिया की मौजूदगी का भरोसा भी दिलाया।
नोबल विजेता प्रो. डगलस ओ'श्राफ ने छात्रों को विज्ञान की नयी चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि परमाणु से आगे की खोज शुरू हो गयी है। अब इसे मानवजीवन के लिए उपयोगिता पर जोर देना चाहिए। उन्होंने आईआईटी जैसे संस्थानों की उपयोगिता भी बतायी। आईआईटी के निदेशक प्रो संजय गोविंद धांडे ने कहा कि विज्ञान के जरिये मानव जीवन को नयी दिशा देनी है तो कड़ी मेहनत करें।
वीडियो कांफ्रेंसिंग से गुरुमंत्र : सर्न के डायरेक्टर जनरल सैफ डाइटर ह्यूअर ने विद्यार्थियों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित किया। परमाणु से आगे के विज्ञान के बारे में बताया। मास्टर बिग एक्सपेरिमेंट ऑफ स्माल पार्टिकल के नाम से पहचान रखने वाले ह्यूंअर ने विज्ञान की सामाजिक चुनौतियों पर छात्रों को गुरुमंत्र दिये।

Source : http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6177660.html

कर्ज देने वालों में हड़कंप (ReIncarnation of Subhash )

कर्ज देने वालों में हड़कंप ( ReBirth of Subhash and His Murder Mistry)

पुनर्जन्म लेने वाले बच्चे के बयानों से उन लोगों में हड़कंप मचा है, जिन्होंने पिछले जन्म में उसे कर्ज दिया था, लेकिन कर्ज अदा न करने पर उसकी हत्या कर दी थी। बच्चे के बयानों के अनुसार जब वह कर्ज चुकता नहीं कर पाया था तो उन लोगों ने उसे बुरी तरह से पीटकर घायल कर दिया था और रेलवे लाइन पर फेंक दिया था और गाड़ी तले कटने से उसकी मौत हो गई थी।
हालांकि पुलिस ने इस मौत के संदर्भ में सात वर्ष पूर्व कर्ज देने वाले फाइनेंसर व उसके कुछ साथियों पर मामला दर्ज कर किया था। जांच के पश्चात यह मामला रद कर दिया गया। लेकिन अब दोबारा जन्म लेकर बयान देने के बाद फाइनेंसर व उसके साथियों के होश उड़े हुए हैं। उन्हें लगने लगा है कि जो फंदा उनके गले से निकल गया था वो कहीं दोबारा न पड़ जाए।
गौर हो कि राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गांव लीलांवाला निवासी अवतार सिंह (7) पुत्र चरण सिंह ने स्थानीय पुलिस को बताया था कि उसका पिछला जन्म अबोहर क्षेत्र के गांव राजांवाली में हुआ था। पिछले जन्म में उसका नाम सुभाष पुत्र फकीर चंद था। 15 अगस्त, 2004 को रुपयों के लेनदेन को लेकर कुछ लोगों ने उसकी हत्या कर दी थी। उसके बाद राजस्थान में जन्म लेने के बाद उसे पिछले जन्म की सारी बातें याद आने लगी। उसे अपने मां-बाप, भाई बहिन सब याद आ गए हैं। अब वो इस मामले में हत्यारों के विरुद्ध कार्रवाई करवाना चाहता है।

Source : http://in.jagran.yahoo.com/news/local/punjab/4_2_7902994.html 
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पिछले जन्म में हुई हत्या को लेकर कार्रवाई की मांग करने के मामले में पंजाब पुलिस को ऐसे तथ्यों की जरूरत है, जिनसे यह साबित हो सके कि उसकी हत्या की गई थी। अगर ऐसा नहीं होगा तो पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उधर, तर्कशील सोसायटी के सदस्यों ने इसको झूठा करार दिया है।
जानकारी के अनुसार राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गांव लीलांवाला निवासी सात वर्षीय बच्चे अवतार सिंह पुत्र चरण सिंह ने स्थानीय पुलिस को बताया कि उसका पिछला जन्म अबोहर क्षेत्र के गांव राजांवाली में हुआ था। पिछले जन्म में उसका नाम सुभाष पुत्र फकीर चंद था। पिछले जन्म में 15 अगस्त, 2004 को रुपयों के लेनदेन को लेकर कुछ लोगों ने उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद उसका राजस्थान में जन्म हो गया व धीरे-धीरे उसको पिछले जन्म की सारी बातें याद आने लगी। अब वो इस मामले में हत्यारों के विरुद्ध कार्रवाई करवाना चाहता है। सात वर्षीय यह बच्चा अपने पुनर्जन्म के माता-पिता व अन्य रिश्तेदारों की पहचान भी करता है।
इस मामले में जिला पुलिस कप्तान कौस्तुभ शर्मा ने बताया कि पुलिस कानून के अनुसार ऐसे तथ्यों पर कार्रवाई नहीं कर सकती। अगर इस मामले में बच्चा लिखित रूप से कोई शिकायत दर्ज करवाता है तो मामले की जांच करवाई जाएगी। अगर जांच के दौरान को गवाह या सबूत उनके हाथ लगता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
इस मामले में तर्कशील सोसायटी के स्थानीय अध्यक्ष गणपत राम ने बताया कि सोसायटी ऐसी बातों में कभी विश्वास नहीं करती। रविवार को जब वह अपने साथी भगवान दास व महेंद्र कुमार के साथ बच्चे व उसके तथाकथित पिछले जन्म के पिता व भाई से मिले तो उनको यह मामला संदिग्ध लगा, क्योंकि सात वर्षीय बच्चा अवतार अपने पिछले जन्म के माता-पिता भाई को तो जानता है और अपने कत्ल की बात करता है और किसी के बारे में कुछ नहीं बताता। सदस्यों ने जब उससे उसके मित्रों व गांव के अन्य लोगों के बारे में पूछा तो वह कुछ भी नहीं बता सका। वह अपने ससुराल पक्ष या उन दुकानदारों को भी नहीं पहचानता जिनके साथ मिलकर वह काम करता था।

Source : http://in.jagran.yahoo.com/news/local/punjab/4_2_7893436.html

विदेशी भी कर रहे हिंदू संस्कारों को आत्मसात

विदेशी भी कर रहे हिंदू संस्कारों को आत्मसात (Even Foerigners Beleiving Hindu Rites and ReBirth )

हरिद्वार [नवीन पांडेय]। पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करने वाले देश भी हिंदू संस्कारों को तेजी से आत्मसात करने लगे हैं। यही कारण है कि विलायती खून में अब हिंदू धार्मिक संस्कारों के प्रति श्रद्धा बढ़ रही है। आश्चर्य की बात यह है कि इजरायल जैसे कट्टर देश के नागरिकों का भी हिंदू संस्कारों में विश्वास बढ़ने लगा है। यूरोप के कई देशों के नागरिकों का पितृ विसर्जन, अस्थि विसर्जन, रुद्राभिषेक, मुंडन, गोदान करने के लिए तीर्थनगरी पहुंचने का सिलसिला जारी है।
पिछले चार वर्ष में तकरीबन 30 विदेशी नागरिकों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया जा चुका है। हरिद्वार आकर करीब चार सौ विदेशियों ने धार्मिक संस्कार संपन्न कराए हैं। यूं तो तीर्थनगरी हरिद्वार के प्रति विदेशियों का लगाव सदियों से रहा है। पहले भी वह इसे धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में देखते रहे, लेकिन बीते चार वर्ष में विदेशियों की सोच में काफी कुछ बदलाव आया है। विशेष तौर पर यूरोपीय देशों डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस, आस्ट्रिया, जर्मनी और इटली के लोग हरिद्वार में हरकी पैड़ी, कनखल सहित अन्य स्थानों पर धार्मिक संस्कार कराने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। पुनर्जन्म में विश्वास नहीं रखने वाले विदेशी अब पितृ विसर्जन भी करने लगे हैं। गंगा में अस्थियां प्रवाहित कर स्वर्ग की बात को वह भी मानने लगे हैं। विदेश में मृत्यु होने पर उनकी अस्थियां जहाज से पार्सल कर यहां पंडितों को भेजी जाती हैं। यदि कोई विदेश में संकट में हो या बीमार हो तो उसकी जन्म तिथि और कुंडली मिलान कर यहां पर पूजा अर्चना भी की जाती है। पूजा के उपरांत पंडित प्रसाद को पार्सल करते हैं। प्राच्य विद्या सोसाइटी के निदेशक डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि उन्होंने अब तक 400 से अधिक विदेशियों के हरकी पैड़ी, कनखल सहित अन्य घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए हैं।

Source : http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_5652438/ 



जन्म से सुलझी मौत की गुत्थी ( Another Story of ReBirth/ReIncarnation)

जन्म से सुलझी मौत की गुत्थी ( Another Story of ReBirth/ReIncarnation)

मैनपुरी: विज्ञान भले ही न माने मगर आंखन देखी और कानन सुनी को नकार पाना संभव नहीं। पुत्रवधू और फिर पुत्र की मौत के कारणों से अनजान ससुराल और मायके वालों में ठन गई। मगर भाई-बहन के रूप में अगला जन्म लेने के बाद जब पुनर्जन्म के पति-पत्नी की दास्तां सुनाई तो मौत की गुत्थी सुलझ गई। ससुराल और मायके के गिले-शिकवे दूर हो गए।
किसी रहस्यमय मगर हकीकत वाली इस कहानी का पटाक्षेप हुआ मैनपुरी जिले के कस्बा बेवर स्थित दक्षिणी काजी टोला निवासी प्रमोद कुमार दुबे और कल्पना दुबे के घर से। 13 साल पहले 6 मार्च को जन्मे जुड़वां भाई-बहन अपने को पूर्व जन्म में एटा के ग्राम दहलई निवासी शाक्य जाति के सूरज पाल व उसकी पत्‍‌नी ममता बताते हैं। 13 साल की बेटी राधा तथा इतनी ही उम्र का बेटा भोले उर्फ विशाल अपने पूर्व जन्म को पूरी तरह से भूल नहीं पाये हैं। कल्पना ने बताया कि 6 मार्च 1998 को जुड़वा पैदा हुये बच्चों ने जब बैठना सीखा, तभी से विशेष संकेत देना शुरू कर दिया था। मसलन पास ही बैठना कोई चीज खिलाओ तो पहले राधा भोले को खिलाती थी। जब बोलना शुरू किया तो पुनर्जन्म की बात कर सबको आश्चर्य में डाल दिया।
जुड़वा यूं बयां करते हैं कहानी
विशाल कहता है कि उसने अपनी गर्भवती पत्‍‌नी ममता के पीठ में डंडा मार दिया था, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। ममता की मृत्यु के ठीक 7 घंटे बाद पुलिस के भय से उसने गांव के बाहर नीम के पेड़ पर फांसी लगा ली थी। दुबे दंपती ने इनकी बातों की हकीकत जानने को तहकीकात की तो सच्चाई निकली।
यादें ताजा होते ही सिहर उठा बालकराम
एटा: अलीगंज विकास खण्ड क्षेत्र के ग्राम दहेलिया में रविवार को बेटे और बहू की असमय हुई मौत की दास्तां सुनाते हुए पिता बालकराम सिहर उठा।
पचास की उम्र पार कर चुके बालकराम ने 'जागरण' को बताया कि अक्टूबर 1997 को गांव में कीर्तन था। वह वहां चला गया था। रात करीब एक बजे जब घर पहुंचा तो उसकी पुत्रवधू ममता मृत पड़ी थी, जबकि बेटा सूरजपाल घर से गायब था। ममता के शव को श्मशान लेकर चल दिये। तभी खबर मिली कि सूरजपाल की लाश नीम के पेड़ पर लटकी हुई है।
बहू की मौत के बाद उसे इतना जरूर पता चला कि किसी बात को लेकर पति-पत्‍‌नी में कुछ विवाद हुआ था। बहू के पिता ने पुलिस को खबर दे दी। सीओ उसे उठा ले गए थे। आठ दिन बाद छोड़ दिया गया। बाद में उसके पिता ने अदालत के आदेश पर उसकी पत्‍‌नी और मृतक सूरजपाल तथा बेटी श्यामा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सूरजपाल की मां शीला का कहना था कि जवान बेटे-बहू की मौत वह अभी तक भुला नहीं सकी है।

Source : http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7926216_1.html

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I am publishing these ReBirth/ReIncarnation stories, So that scientists/ psychologists gave a clear picture.
Are these ReBirth really possible OR some thing special beyond science happens that We don't know.

Lie detector / Other special apparatus can be used to know the real truth.

अबोध बालक सुना रहा पुनर्जन्म का किस्सा

अबोध बालक सुना रहा पुनर्जन्म का किस्सा ( Infant boy, telling the story of rebirth )

Is Reincarnation/Re Birth Story Evidence - God Existence


कुम्मी [सुंदरनगर], [हंसराज सैनी]। वैज्ञानिकों के लिए पुनर्जन्म की बातें भले कोरी कल्पना हो पर बल्ह विधानसभा क्षेत्र के सवा दो साल के बालक के माता-पिता के लिए यह परेशानी का सबब बन गया है। इलाके के लोग भी इस चर्चा से हैरान हैं। यह अबोध बालक कई दिन से लगातार पिछले जन्म की बातें कहकर अपने पुराने घर जाने की जिद कर रहा है।
पुनर्जन्म की बात करने वाला बालक निखिल इस समय मात्र दो साल चार माह का है। वह बल्ह हलके के कुम्मी गांव निवासी दलित समुदाय के भागीरथ का पुत्र है। भागीरथ ने बताया कि निखिल पिछले कई दिन से एक ही रट लगाए हुए है कि वह पिछले जन्म में सुंदरनगर के कांगू कस्बे का रहने वाला था और ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखता था। उसकी मौत युवावस्था में ही एक सड़क हादसे में हुई थी। इस हादसे में उसकी बहन भी मौत का ग्रास बन गई थी। मात्र एक साल की उम्र में बोलना शुरू करने वाले निखिल के मुंह से यह बातें सुनकर उसके पिता भागीरथ व माता सुरेंद्रा कुमारी ने पहले विश्वास नहीं किया। सवा वर्ष बाद जब निखिल अपने पिछले घर यानि कांगू हमेशा के लिए जाने की जिद करने लगा तो परिजनों के होश उड़ गए। निखिल की बातों की विश्वसनीयता जांचने के लिए परिजनों ने पहले मंदिरों का सहारा लिया तो वहां भी उसके दावों पर मुहर लगाई गई, जिससे भागीरथ व सुरेंद्रा के दिल की धड़कने बढ़ गई। हर हालात में अपने पूर्व घर जाने पर आमादा दिख रहे निखिल की याददाश्त को भुलाने की परिजन हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। मां-बाप इकलौते लाडले को किसी भी सूरत में नहीं खोना चाहते हैं।
भागीरथ का कहना है कि निखिल जब छह माह का था तो गाड़ियों का शोर सुन या गाड़ी देख मां के आंचल में सहम कर जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर देता था। वहीं सुरेंद्रा का कहना है कि वह बेटे के मुंह से पुनर्जन्म की बातें सुनकर तंग आ चुकी है। सुरेंद्रा को यह भी डर है कि निखिल बड़ा होकर सचमुच कहीं कांगू न चला जाए, इसलिए इतने दिनों तक मामले पर पर्दा डाले रखा।
मामले की सत्यता जानने के लिए जब इस पत्रकार ने कांगू के पंचायत उप प्रधान चेतन शर्मा से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्ष में विभिन्न सड़क हादसों में ब्राह्मण परिवार के कई युवकों की मौत हुई हैं।
विशेषज्ञ की राय:
-हालांकि पराविज्ञान या धर्म शास्त्र को मानने वाले धार्मिक लोग इस पर पूर्ण विश्वास करते है। क्योंकि ऐसा व्यक्ति पूरे तथ्यों व साक्ष्यों के साथ अपनी बात रखता है जिसे साबित भी किया जाता है, इसलिए इसे नकारा नहीं जा सकता। लेकिन विज्ञान में इसे अब तक किए प्रयोगों में साबित नहीं किया जा सका है। इसे 'मेंटल डिस्आर्डर' भी नहीं कहा जा सकता। विज्ञान की भाषा में इसे 'स्पेशल एबिलिटी' कहा जाता है। जिस तरह से कई लोग अपनी तीव्र मस्तिष्क शक्ति से कई असाध्य कार्य कर देते हैं, उसी तरह से पुनर्जन्म की बात करने वाले लोग भी असाधारण होते है।'
[डा. रवि शर्मा, मनोचिकित्सक, इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज व अस्पताल]

Source : http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_4089662/ 

Wednesday, July 20, 2011

Could a Little Boy Be Proof of Reincarnation?

Could a Little Boy Be Proof of Reincarnation?


Nearly six decades ago, a 21-year-old Navy fighter pilot on a mission over the Pacific was shot down by Japanese artillery. His name might have been forgotten, were it not for 6-year-old James Leininger. Quite a few people — including those who knew the fighter pilot — think James is the pilot, reincarnated. James' parents, Andrea and Bruce, a highly educated, modern couple, say they are "probably the people least likely to have a scenario like this pop up in their lives." But over time, they have become convinced their little son has had a former life.

From an early age, James would play with nothing else but planes, his parents say. But when he was 2, they said the planes their son loved began to give him regular nightmares. "I'd wake him up and he'd be screaming," Andrea told ABCNEWS' Chris Cuomo. She said when she asked her son what he was dreaming about, he would say, "Airplane crash on fire, little man can't get out."

Reality Check
Andrea says her mom was the first to suggest James was remembering a past life. At first, Andrea says she was doubtful. James was only watching kids' shows, his parents say, and they weren't watching World War II documentaries or conversing about military history. But as time went by, Andrea began to wonder what to believe. In one video of James at age 3, he goes over a plane as if he's doing a preflight check. Another time, Andrea said, she bought him a toy plane, and pointed out what appeared to be a bomb on its underside. She says James corrected her, and told her it was a drop tank. "I'd never heard of a drop tank," she said. "I didn't know what a drop tank was." Then James' violent nightmares got worse, occurring three and four times a week. Andrea's mother suggested she look into the work of counselor and therapist Carol Bowman, who believes that the dead sometimes can be reborn. With guidance from Bowman, they began to encourage James to share his memories — and immediately, Andrea says, the nightmares started become less frequent. James was also becoming more articulate about his apparent past, she said. Bowman said James was at the age when former lives are most easily recalled. "They haven't had the cultural conditioning, the layering over the experience in this life so the memories can percolate up more easily," she said.
Trail of Mysteries
Over time, James' parents say he revealed extraordinary details about the life of a former fighter pilot — mostly at bedtime, when he was drowsy. They say James told them his plane had been hit by the Japanese and crashed. Andrea says James told his father he flew a Corsair, and then told her, "They used to get flat tires all the time." In fact, historians and pilots agree that the plane's tires took a lot of punishment on landing. But that's a fact that could easily be found in books or on television. Andrea says James also told his father the name of the boat he took off from — Natoma — and the name of someone he flew with — "Jack Larson." After some research, Bruce discovered both the Natoma and Jack Larson were real. The Natoma Bay was a small aircraft carrier in the Pacific. And Larson is living in Arkansas. "It was like, holy mackerel," Bruce said. "You could have poured my brains out of my ears. I just couldn't believe it.

James 2 = James M. Huston Jr.?
Bruce became obsessed, searching the Internet, combing through military records and interviewing men who served aboard the Natoma Bay. He said James told him he had been shot down at Iwo Jima. James had also begun signing his crayon drawings "James 3." Bruce soon learned that the only pilot from the squadron killed at Iwo Jima was James M. Huston Jr. Bruce says James also told him his plane had sustained a direct hit on the engine. Ralph Clarbour, a rear gunner on a U.S. airplane that flew off the Natoma Bay, says his plane was right next to one flown by James M. Huston Jr. during a raid near Iwo Jima on March 3, 1945. Clarbour said he saw Huston's plane struck by anti-aircraft fire. "I would say he was hit head on, right in the middle of the engine," he said.


Treasured Mementos
Bruce says he now believes his son had a past life in which he was James M. Huston Jr. "He came back because he wasn't finished with something." The Leiningers wrote a letter to Huston's sister, Anne Barron, about their little boy. And now she believes it as well. "The child was so convincing in coming up with all the things that there is no way on the world he could know," she said. But Professor Paul Kurtz of the State University of New York at Buffalo, who heads an organization that investigates claims of the paranormal, says he thinks the parents are "self-deceived." "They're fascinated by the mysterious and they built up a fairy tale," he said. James' vivid, alleged recollections are starting to fade as he gets older — but among his prized possessions remain two haunting presents sent to him by Barron: a bust of George Washington and a model of a Corsair aircraft. They were among the personal effects of James Huston sent home after the war. "He appears to have experienced something that I don't think is unique, but the way it's been revealed is quite astounding," Bruce said. Asked if the idea that James may have been someone else changes his or his wife's feeling about their son, Bruce said: "It doesn't change how we think. I don't look at him and say, 'That's not my boy.' That's my boy."

Source : http://www.reversespins.com/proofofreincarnation.html


http://www.dailymail.co.uk/femail/article-1209795/Reincarnated-Our-son-World-War-II-pilot-come-life.html

Tuesday, July 19, 2011

हम सब अब हिंदू हैं ! –अमेरिका में गूंजा

हम सब अब हिंदू हैं ! –अमेरिका में गूंजा
अमेरिकी साप्ताहिक ‘न्यूजवीक’ में लिजा मिलर का वक्तव्य !
( We are Hindu - Coined in USA)
American NewsWeek - Liza Milar

कम से कम हमारे देश में कथिक प्रबुद्ध विचारकों को इस बात से अवश्य आश्चर्य होगा यदि कोई अमेरिकी पत्रकार विश्व विख्यात अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘न्यूजवीक ‘, ( अगस्त 24 व 31, 2009) में टिप्पणी लिखे कि अमेरिका एक ईसाई राष्ट्र नहीं रहा है। सेमिटिक धर्मों की गलाकाट प्रतिद्वंदिता व अपनी-अपनी श्रेष्ठता-ग्रंथि के बावजूद आज अनेक चिंतक व विचारक आर्नाल्ड टायनबी की उस अवधारणा में विश्वास करने लगे हैं जिनमें उन्होंने कहा था कि विश्व भविष्य हिन्दू-बौद्ध अवस्थाओं की वापसी द्वारा ही निर्णीत होगा जो एक बड़ी संभावना है।
लिजा मिलर नामक लेखिका ने अपनी उपर्युक्त टिप्पणी में कहा है कि यद्यपि यह सच है कि अमेरिकी राष्ट्र की नींव ईसामसीह के अनुयाइयों द्वारा रखी गई थी और आज भी हर अमेरिकी राष्ट्रपति यह बात दोहराता है कि चर्च अमेरिकी प्रजातंत्र की आत्मा है पर आस्थाओं के सहअस्तित्व, बहुसंस्कृतिवाद और बहुलतावादी समावेशी दृष्टि मान हिन्दु धर्म की छत्रछाया में ही पनप सकती है। लिजा मिलर ने सन 2008 में किए गए एक सर्वेक्षण को उध्दृत करते हुए लिखा है कि अब मात्र 76 प्रतिशत अमेरिकी हीं अपनी पहचान को ईसाई बताकर ईसाई इंगित करते हैं। यद्यपि बहुसंख्यक अभी भी अपने को हिंदु, मुस्लिम या यहुदी राष्ट्र से जोड़ना नहीं चाहेंगे पर जो हवा आज अमेरिका में बह रही है उसमें हिंदु आस्था के अनेक आयाम जैसे योग, ध्यान, शाकाहार, अहिंसा, भक्ति एवं उत्सवी संस्कृति अधिकाधिक रूप से स्वीकार्य है।
आज 10 लाख से अधिक संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंदू रहते है और कभी भारत के भीतर वे यद्यपि हीनता-ग्रंथि या संशय के कभी-कभी शिकार हो सकते हैं पर अमेरिका में रहने वाले हिंदू, अंतर्विरोधों के बावजूद, अधिक समान्नित, जाग्रत और अपने अतित व परंपराओं का आदर करते हैं


लिजा मिलर के अनुसार, अब अमेरिकी यह विचार कि वे ही धार्मिक रूप से श्रेष्ठ हैं, छोड़ना चाहते हैं। सन 2008 को ‘पिव फोरम’ के सर्वेक्षण के अनुसार 65 प्रतिशत अमेरिकी विश्वास करने लगें हैं कि ‘कई धर्मों के विश्वास की बातों में शाश्वत जीवन के रहस्य छिपे हैं जिनमें 37 प्रतिशत वे लोग जो श्वेत इवेंजिलिक्स वर्ग में आते हैं। चर्च के बाहर के विश्वासों में मुक्ति-मार्ग की खोज अब अधिकाधिक लोग कर रहे हैं

अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि मृत्यु के बाद क्या होता है? सामान्यरुप से ईसाइयों का विश्वास है कि शरीर और आत्मा दोनों पवित्र हैं क्योंकि जीवों को पुनरुत्थान के समय वे पुनः जीवित होंगे। हिंदू इनमें विश्वास नहीं करते हैं और इसलिए मृत शरीर को चिता में जलाते हैं क्योंकि आत्मा मुक्त हो जाती है या पुनर्जन्म होता है। ‘क्रिमेशन एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका’ के अनुसार आज एक तिहाई अमेरिकी मृतदेह का दाहकार्य करने का विकल्प चुनते हैं जब कि 1975 में यह मात्र 6 प्रतिशत था।

Source : http://atulayabharat.com/?p=11617

पुनर्जन्म में यकीन करते हैं 24 फीसदी अमेरिकी

पुनर्जन्म में यकीन करते हैं 24 फीसदी अमेरिकी
(24 % Americans  Believe in Reincarnation / Rebirth : Amazing)

वाशिंगटन स्थित शोध संगठन 'प्यू रिसर्च सेंटर' द्वारा कराए गए सर्वेक्षण से यह तथ्य उजागर हुआ है। सर्वेक्षण के अनुसार 24 फीसदी वयस्क जहां पुनर्जन्म और योग में यकीन रखते हैं वहीं कुल जनसंख्या के एक चौथाई वयस्कों ने बताया कि वे ज्योतिष और पूर्वी धर्मो में विश्वास रखते हैं।

प्रतिष्ठित पत्रिका 'न्यूजवीक' ने 'हम सब अब हिंदू हैं' नामक शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया है, जिसमें कहा गया है कि अब अमेरिकी जनता ईश्वर और जीवन को हिंदू पद्धति के अनुसार देखने लगी है।

'यूनिवर्सल सोसाइटी ऑफ हिंदुइज्म' के अध्यक्ष राजन जेद ने 'प्यू रिसर्च सेंटर' के सर्वेक्षण का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन का सबसे जटिल घटक होता है। राजन ने कहा कि हम सभी सत्य की खोज में जुटे रहते हैं और इसके लिए हम सभी मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "हम सभी अनेकता में एकता चाहते हैं।"

उल्लेखनीय है कि योग, पुनर्जन्म और ज्योतिष हिंदू दर्शन का हिस्सा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।